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Thursday, June 2, 2022

भारत के प्रमुख तीर्थस्थल

 मनेर : सूफी संतों की पहली कर्मभूमि॥



बिहार अनेक धर्मावलंबियों की पवित्र भूमि है। इसे बौद्ध, जैन, सिख, हिंदू तथा मुसलिम संत महात्माओं की जन्म एवं कर्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। यहाँ विभिन्न प्रकार के मतों के साथ सूफीवाद का भी जन्म हुआ। कहते हैं कि यहाँ मन से माँगी गई मन्नतें बहुत जल्द पूरी होती हैं।


मनेर को इतिहास में समय-समय पर विभिन्न नामों से जाना गया है। गंगा तट की वह मणिमती नगरी, जो इल्वल की राजधानी थी। मनेर का प्रारंभिक और वास्तविक नाम मनियार मठान' था। प्राचीनकाल में यहाँ राजा मनियार का शासन था, जिससे इसका नाम 'मनेर' पड़ा। कुछ का कहना है कि मनेर पत्थरों का व्यापारिक केंद्र होने से इसका नाम 'मनियार पत्थर' पड़ गया, जो कालांतर में मनेर हो गया।


राजा मनेर के शासन काल में अरब से मौलाना सैयद शाह मुहम्मद यहाँ आए और हिंदू शासक पराजित कर मनेर पर अधिकार कर लिया। फिर 1788 ई. में बख्तियार खिलजी ने मनेर पर अधिकार कर लिया।


मुगलकालीन दो मकबरों के कारण मनेर को अद्भुत प्रसिद्धि मिली है। एक मकबरा' छोटी दरगाह ' के नाम से जाना जाता है; जबकि दूसरा मकबरा 'बड़ी दरगाह' के नाम से प्रसिद्ध है। आध्यात्मिक गुरु शाह दौलत के निधन के पश्चात् उन्हें सम्मान देने के उद्देश्य से 1613 से 1618 के मध्य उनके मकबरे का निर्माण करवाया, जो छोटी दरगाह के नाम से प्रसिद्ध है। वही छोटी दरगाह आज 'मनेरशरीफ' के नाम से जानी जाती है। यह एक सुंदर मकबरा है, जो सासाराम स्थित शेरशाह के मकबरे के बाद बिहार में मध्ययुगीन स्थापत्य कला का सबसे आकर्षक नमूना माना जाता है। यह एक ऊँचे चबूतरे पर निर्मित है। मकबरे के ऊपर एक विशाल गुंबद पर कुरान की आयतें लिखी हैं। वस्तुतः इस मकबरे पर फतेहपुर सीकरी के मकबरे का प्रभाव परिलक्षित होता है। इसके पश्चिम में सन् 1618 में निर्मित एक भव्य मसजिद है, जहाँ आज भी नमाज पढ़ी जाती है।

पहुँचने का 🚗🚗🚉🚉🚉

सड़क मार्ग : पटना से 30 किलोमीटर, रेल मार्ग: निकटवर्ती रेलवे स्टेशन - बिहटा, हवाई मार्ग :

पटना हवाई अड्डा ।



1 comment:

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  ://drive.google.com/file/d/1mxTkpR4k7cQBa6dD0JNGYvzeD-7ISmlz/view?usp=sharing  shravan Aap sabi se nivedan karta hai ki wah jaha bhi motor...