पावापुरी तीर्थकर महावीर की निर्वाण स्थली
पावापुरी वह पवित्र स्थल है, जहाँ धार्मिक उपदेश देते हुए कार्तिक अमावस्या को तीर्थंकर भगवान् महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। उस स्थान पर आज भी एक प्राचीन स्तूप स्थित है।
 |
भगवान् महावीर भगवान् महावीर का जहाँ दाह संस्कार हुआ था, वहाँ कमल सरोवर के बीच एक टापू पर सफेद संगमरमर का एक छोटा एवं सुंदर मंदिर बनवाया गया है। भगवान् महावीर के बड़े भाई नंदीवर्धन ने जिस मंदिर का निर्माण करवाया तथा उसकी नींव पर आधुनिक जल मंदिर के वेदी-स्थल की भराई सोने की ईंटों से की गई थी। राजस्थानी शैली के सफेद मंडप स्तंभों के आच्छादनकारी गुंबद की कारीगरी लावण्य तथा आकर्षक नक्काशी से को गई है, जो अवर्णनीय है। मंदिर के चारों ओर जल ही जल है। चारों किनारों पर गोलाकार गुमटों पर स्वर्ण - कलश हैं।
पावापुरी के जल मंदिर में कार्तिक अमावस्या की प्रातः चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर का निर्वाण महोत्सव मनाया जाता है। दीपावली की पूर्व संध्या से ही श्रद्धालु भगवान् महावीर की पूजा-अर्चना प्रारंभ कर देते हैं। चाँदी के बने रथ पर सोने की बनी भगवान् महावीर की मूर्ति सजाकर रखी जाती है। रथ को श्रद्धालु खींचते हैं। इसके पीछे लकड़ी से बने रथ को आकर्षक तरीके से सजाकर श्रद्धालु जल मंदिर तक ले जाते हैं। इस शोभायात्रा में महिलाएँ अपने सिर पर कलश रखती हैं, जिसमें शंख, लक्ष्मी, कलश, जहाज आदि चौदह सामग्री होती हैं। इस रात यहाँ का दृश्य बड़ा ही मनमोहक होता है!! निर्वाण - लड्डू चढ़ाने और श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। चतुर्दशो में प्रातः काल भगवान् का मस्तकाभिषेक और विशेष पूजन होता है। फिर निर्वाण लड्डू चढ़ाया जाता है। मध्यरात्रि में ठीक बारह बजे रथयात्रा के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है, जो जल मंदिर की परिक्रमा करती हुई पश्चिम की ओर बने रथपिंड पर जाती है, वहाँ भगवान् महावीर का पूजन किया जाता है।
पहुँचने का मार्ग
सड़क मार्ग : पटना से 92 किलोमीटर, राजगीर से 16 किलोमीटर, बिहार शरीफ से 14 किलोमीटर, • नालंदा से 25 किलोमीटर; रेल मार्ग: निकटवर्ती रेलवे स्टेशन- पावापुरी, हवाई मार्ग: पटना हवाई अड्डा । |
Good bloging
ReplyDelete