हिंदुओं का महान् तीर्थ : गया
पाँच पहाड़ियों से घिरा होने के कारण गया शहर की स्थिति मनोरम बन जाती है। यह उत्तर-पश्चिम से मुरली पहाड़, पश्चिम से कटारी हिल, उत्तर-पूर्व में रामशिला, पूर्व में अवगिला की पहाड़ी तथा दक्षिण में ब्रह्मयोनि पहाड़ से घिरा है। गया हिंदुओं का महान् तीर्थस्थल है। भगवान् विष्णु ने गयासुर को पापियों को उबारकर सीधे स्वर्ग भेजने की एक दैवी शक्ति प्रदान की थी।
शास्त्रों में वर्णित है कि गया में एक बार पितरों का श्राद्ध करने के बाद पुनः श्राद्ध की जरूरत नहीं पड़ती। सनातन हिंदू धर्म में गंगा तट पर अंतिम संस्कार और गया में पिंडदान करना परम पवित्र माना गया है।। पुराणों के अनुसार यह गयासुर राक्षस का निवास स्थान था, जिसे विष्णु ने राक्षसी प्रवृत्ति से मुक्त किया था।
विष्णुपद :
वैष्णवों के लिए यह प्रमुख तीर्थस्थलों में एक है। विध्वंस होने पर सोलहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में राजपूत राजाओं ने मजबूत सुंदर पत्थरों को चूने से इसका जीर्णोद्धार कराया।
मंदिर के सामने थोड़ी दूर पर एक गज मूर्ति खड़ी है, जो सूँड़ में फल और फूल लिये हुए है। मानो वह विष्णुपद पर फल-फूल समर्पित कर रहा हो। इस मंदिर के संबंध में कहा जाता है कि कोई चोर मंदिर केऊपर सोने की छतरी चुराने के लिए चढ़ा था। वह ऊपर से गिरा और पत्थर का हो गया। वहीं पर एक काला पत्थर लगा दिया गया है। विष्णुपद जिस पहाड़ी पर है, वह गया के पूर्वी किनारे पर है। वहाँ उत्खनन के क्रम में गुप्त कालीन मिट्टी की मुहर मिली है, जिस पर त्रिशूल, दंड, शंख और चक्र अंकित हैं। इसकी बाईं ओर चंद्र तथा पहिए का चिह्न है।
मंगलागौरी : कालिका पुराण के अनुसार गया में सती का स्तन मंडल भस्मकूट पर्वत के ऊपर दो पत्थरों पर गिरा था। इसी प्रस्तरमयी स्तन मंडल में मंगलागौरी माँ नित्य निवास करती हैं। जो मनुष्य शिला का स्पर्श करते हैं, वे अमरत्व को प्राप्त कर ब्रह्मलोक में निवास करते हैं। इस शक्तिपीठ की विशेषता है कि मनुष्य यहाँ अपने जीवनकाल में ही अपना श्राद्ध कर्म संपादित कर सकता है।
प्रेतशिला पर्वत यह पर्वत गया शहर से 6 मील उत्तर पश्चिम में अवस्थित है। हिंदू धर्म के अनुसार यह प्रेत राजा यम के निवासस्थान के रूप में चिह्नित है। इसी के नीचे रामकुंड है, कहा जाता है किश्रीराम ने इसी कुंड में स्नान किया था।
ब्रह्मयोनि ब्रह्मनि पहाड़ यहाँ की मुख्य पहाड़ियों में से एक है। इसके ऊपरी भाग में लंबी, 2 प्रकृतिक दरार हैं, जो मातृयोनि और मिठ्योनि के नाम से प्रसिद्ध हैं। इस योनि से होकर गुजरने पर मनुष्य पुनर्जन्म के भय से मुक्त हो जाता है।
समशिला रामशिला एक प्रसिद्ध धर्मतीर्थ है, जहाँ से संपूर्ण गया क्षेत्र का नजारा बढ़ा ही मनीरम दिखता है। टिकारी नरेश द्वारा बनवाई गई मोहियों से युक्त इस पर्वत पर पातालेश्वर शिव और राम-लक्ष्मण मंदिर दर्शनीय है।।
पहुँचने का मार्ग
सड़क मार्ग: पटना से 112 किलोमीटर रेल मार्ग निकट रेलवे स्टेशन- गया कोलकाता से 458 किलोमीटर, वाराणसी से 220 किलोमीटर हवाई मार्ग: पटना और गया हवाई अड्डा

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